गंगा में इफ्तार पार्टी पर कोर्ट का रुख सख्त, 14 आरोपियों को भेजा जेल, 23 मार्च को होगी बेल पर सुनवाई

गंगा में इफ्तार पार्टी पर कोर्ट का रुख सख्त, 14 आरोपियों को भेजा जेल, 23 मार्च को होगी बेल पर सुनवाई

Court Takes Strict Stance on Iftar Party in the Ganges

Court Takes Strict Stance on Iftar Party in the Ganges

Court Takes Strict Stance on Iftar Party in the Ganges: वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने और कथित रूप से चिकन बिरयानी खाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में गिरफ्तार सभी 14 आरोपियों को एसीजेएम-9 कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. अब इन आरोपियों की ईद जेल में ही मनेगी.

कोर्ट परिसर के बाहर भारी गहमागहमी थी. शाम सवा सात बजे भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पुलिस वैन में आरोपी कोर्ट में पेश किए गए. बचाव पक्ष के वकील राणा यादव ने कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई के लिए 23 मार्च 2026 की तारीख तय की गई है.

वादी पक्ष के वकील शशांक शेखर ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने गंगा में चिकन खाकर उसकी हड्डियां नदी में फेंकी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. साथ ही उन्होंने नाविकों को बंधक बनाने और आपत्तिजनक नारे लगाने का भी आरोप लगाया और सख्त कार्रवाई की मांग की.

झूठे और मनगढ़ंत हैं आरोप

वहीं बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया. उनका कहना है कि पुलिस ने गलत तरीके से केस दर्ज किया है और वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने टीआरपी बटोरने के लिए गलत एलिगेशन लगाए हैं. नाविकों को जबरदस्ती ले जाना और गंगा में हड्डी फेंकने के आरोप बिल्कुल निराधार हैं. एआई वीडियो का सहारा लेकर पापड़ को चिकन बिरयानी दिखाया गया.

गंगा घाट पर जल पुलिस की मौजूदगी में क्या ये संभव है कि नाविकों को बंधक बनाया जा सके. इसलिए हमने बेल एप्लीकेशन कोर्ट में दिया है जिस पर 23 मार्च को सुनवाई होनी है. हमें उम्मीद है कि हमारा बेल एप्लीकेशन मंजूर होगा.

आया नया मोड़

मामले में नया मोड़ तब आया जब नाविक रंजन साहनी और अनिल साहनी के बयान सामने आए. एसीजेएम कोर्ट में मौजूद रहे अधिवक्ता नित्या नंद राय ने बताया कि बीते सोमवार को पंचगंगा घाट के सामने नाव पर ये 14 आरोपी इफ्तार के नाम पर चिकन बिरयानी खा रहे थे. इस मामले में सभी 14 आरोपियों पर कोतवाली थाने में 11 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.

बाकी दस धाराओं में सजा का प्रावधान सात साल से कम है, लेकिन नाविक रंजन साहनी और अनिल साहनी के बयान पर जो बीएनएस की धारा 308(5) के तहत दर्ज हुई है. इस एक धारा ने केस में ट्विस्ट ला दिया. दोनों नाविकों ने अपने बयान में कहा है कि आरोपियों ने उनको बंधक बना लिया था और जबरदस्ती नाव लेकर अपनी मर्जी से गए थे. साथ ही चिकन भी अपनी मर्जी से खा रहे थे. पब्लिक प्रॉस्क्यूटर ने नाविकों के बयान कोर्ट को पढ़कर सुनाया.

परिजनों ने कहा, पुलिस ने धर्म देख की कार्रवाई

गंभीर धाराएं जुड़ने के चलते कोर्ट ने जमानत पर तुरंत राहत नहीं दी और सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं परिजनों का कहना है कि युवक 18-19 साल के हैं और रील बनाने के चक्कर में उनसे गलती हुई है. लड़के कोर्ट में रो रहे थे और गिड़गिड़ा रहे थे. कोर्ट को उन पर दया दिखानी चाहिए. इतनी बड़ी गलती उन्होंने ने नही की है, जो आरोप लगा है वो सब निराधार है. पुलिस ने सिर्फ धर्म देख कर कार्रवाई की है, लेकिन कोर्ट से हम लोगों को पूरी उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा.